Attitude Shayari “इतना Attitude न दिखा जिंदगी में”
Shisha Vahi Rehta Hai ,Par Tasveer Badalti Rehti Hai.

इतना Attitude न दिखा जिंदगी में तकदीर बदलती रहती है,
शीशा वहीं रहता है, पर तस्वीर बदलती रहती है।
اتنا اٹھتیتدے نہ دکھا زندگی می تقدیر بدلتی رہتی ہے
شیشہ وہی رہتا ہے پر تصویر بدلتی رہتی ہے
Ek Talwar Ki Keemat Hoti Hai Uski Dhaar Se,
Insaan Ki Keemat Hoti Hai Uske Vyavhaar Se.
Insaan Ki Keemat Hoti Hai Uske Vyavhaar Se.
एक तलवार की कीमत होती है उसकी धार से ,
इंसान की कीमत होती है उसके व्यवहार से।
इंसान की कीमत होती है उसके व्यवहार से।
ایک تلوار کی کےمت ہوتی ہے اسکی دھار سے
انسان کی کےمت ہوتی ہے اسکے ویوھار سے
انسان کی کےمت ہوتی ہے اسکے ویوھار سے
Mere Saath Jab Main Khud Khada Hota Hoon,
Tab Main Qayamat Ke Har Toofaan Se Bada Hota Hoon.
Tab Main Qayamat Ke Har Toofaan Se Bada Hota Hoon.
मेरे साथ जब मैं खुद खड़ा होता हूँ,
तब मैं क़यामत के हर तूफ़ान से बड़ा होता हूँ।
तब मैं क़यामत के हर तूफ़ान से बड़ा होता हूँ।
میرے ساتھ جب می خود خڈا ہوتا ہو
تب می قیامت کے ہر توفان سے بڑا ہوتا ہو
تب می قیامت کے ہر توفان سے بڑا ہوتا ہو
Khatm Ho Bhi Toh kaise ,Yeh Manzilon Ki Aarzo,
Yeh Raaste Hai Ke Rukte Nhi ,Aur Hum Hai Ke Jhukte Nhi ......
Yeh Raaste Hai Ke Rukte Nhi ,Aur Hum Hai Ke Jhukte Nhi ......
ख़त्म हो भी तो कैसे, ये मंजिलो की आरजू,
ये रास्ते है के रुकते नहीं, और हम है के झुकते नही......!!!
ये रास्ते है के रुकते नहीं, और हम है के झुकते नही......!!!
ختم ہو بھی تو کیسے یہ منزلوں کی آرزو
یہ راستے ہے کی روکتے نہی اور ہم ہے کے جھکتے نہی
یہ راستے ہے کی روکتے نہی اور ہم ہے کے جھکتے نہی
Chalo Aaj Phir Thoda Muskuraya Jaaye,
Bina Maachis Ke Kuch Logo Ko Jalaya Jaaye......
Bina Maachis Ke Kuch Logo Ko Jalaya Jaaye......
चलो आज फिर थोडा मुस्कुराया जाये,
बिना माचिस के कुछ लोगो को जलाया जाये.....!!!
बिना माचिस के कुछ लोगो को जलाया जाये.....!!!
چالو آج پھر تھوڈا مسکرایا جائے
بنا ماچس کے کچھ لوگو کو جلایا جائے
بنا ماچس کے کچھ لوگو کو جلایا جائے
Agar fitrat hamari sehne ki na
hoti toh himmat tumhari bhi
kuch kehne ki na hoti..!!
hoti toh himmat tumhari bhi
kuch kehne ki na hoti..!!
अगर फितरत हमारी सहने की ना
होती तोह हिम्मत तम्हारी भी
कुछ कहने की ना होती।
होती तोह हिम्मत तम्हारी भी
कुछ कहने की ना होती।
اگر فطرت ہماری سہنے کی نہ
ہوتی تو ہمّت تمہاری بھی
کچھ کہنے کی نہ ہوتی
ہوتی تو ہمّت تمہاری بھی
کچھ کہنے کی نہ ہوتی