Attitude Shayari “Mat Karo Meri Peeth Ke Pheeche Baat Jakar Kone Mai”
Ek Talwar Ki Keemat Hoti Hai Uski Dhaar Se,
Insaan Ki Keemat Hoti Hai Uske Vyavhaar Se.
Insaan Ki Keemat Hoti Hai Uske Vyavhaar Se.
एक तलवार की कीमत होती है उसकी धार से ,
इंसान की कीमत होती है उसके व्यवहार से।
इंसान की कीमत होती है उसके व्यवहार से।
ایک تلوار کی کےمت ہوتی ہے اسکی دھار سے
انسان کی کےمت ہوتی ہے اسکے ویوھار سے
انسان کی کےمت ہوتی ہے اسکے ویوھار سے
Sher Ghayal Hai Magar Dahadna Nhi Bhula.....
Ek Baar Mai Sau Ko Pchadna nhi bhula.....
Ek Baar Mai Sau Ko Pchadna nhi bhula.....
शेर घायल है मगर दहाड़ना नहीं भूला…
एक बार में सौ को पछाड़ना नहीं भूला…!!
एक बार में सौ को पछाड़ना नहीं भूला…!!
شیر گھیال ہے مگر دھڈنا نہی بھلا
ایک بار می سو کو پچاڈنا نہی بھلا
ایک بار می سو کو پچاڈنا نہی بھلا
Sir Jhukane Ki Aadat Nhi Hai,
Aansu Bahane Ki Aadat nhi Hai ,
Hm Kho gaye To Pachtaoge Bahat,
Kyunki Hamari Laut Ke Aane Ki Aadat Nhi Hai....
Aansu Bahane Ki Aadat nhi Hai ,
Hm Kho gaye To Pachtaoge Bahat,
Kyunki Hamari Laut Ke Aane Ki Aadat Nhi Hai....
सर झुकाने की आदत नहीं है,
आँसू बहाने की आदत नहीं है,
हम खो गए तो पछताओगे बहुत,
क्युकी हमारी लौट के आने की आदत नहीं है......!!!
आँसू बहाने की आदत नहीं है,
हम खो गए तो पछताओगे बहुत,
क्युकी हमारी लौट के आने की आदत नहीं है......!!!
سر جھکانے کی عادت نہی ہے
آنسو بہانے کی عادت نہی ہے
ہم کھو گئے تو پچتاؤگے بہت
کیکی ہماری لوٹ کے آنے کی عادت نہی ہے
آنسو بہانے کی عادت نہی ہے
ہم کھو گئے تو پچتاؤگے بہت
کیکی ہماری لوٹ کے آنے کی عادت نہی ہے
Chalo Aaj Phir Thoda Muskuraya Jaaye,
Bina Maachis Ke Kuch Logo Ko Jalaya Jaaye......
Bina Maachis Ke Kuch Logo Ko Jalaya Jaaye......
चलो आज फिर थोडा मुस्कुराया जाये,
बिना माचिस के कुछ लोगो को जलाया जाये.....!!!
बिना माचिस के कुछ लोगो को जलाया जाये.....!!!
چالو آج پھر تھوڈا مسکرایا جائے
بنا ماچس کے کچھ لوگو کو جلایا جائے
بنا ماچس کے کچھ لوگو کو جلایا جائے
Agar fitrat hamari sehne ki na
hoti toh himmat tumhari bhi
kuch kehne ki na hoti..!!
hoti toh himmat tumhari bhi
kuch kehne ki na hoti..!!
अगर फितरत हमारी सहने की ना
होती तोह हिम्मत तम्हारी भी
कुछ कहने की ना होती।
होती तोह हिम्मत तम्हारी भी
कुछ कहने की ना होती।
اگر فطرت ہماری سہنے کی نہ
ہوتی تو ہمّت تمہاری بھی
کچھ کہنے کی نہ ہوتی
ہوتی تو ہمّت تمہاری بھی
کچھ کہنے کی نہ ہوتی