Aasman ko Zid Hai Jaha Bijiliyan Girane Ki ,
Humein Bhi Zid Hai Vahi Aashiyan Banane Ki.....
Humein Bhi Zid Hai Vahi Aashiyan Banane Ki.....
आसमान को ज़िद है जहा बिजलियाँ गिराने की ,
हमें भी ज़िद है वही आशियाँ बनाने की।
हमें भी ज़िद है वही आशियाँ बनाने की।
آسمان کو زد ہے جہا بجلیاں گرانے کی
ہمے بھی زد ہے وہی اشیا بنانے کی
ہمے بھی زد ہے وہی اشیا بنانے کی
Kya ajeeb si zid hai..
hum dono ki..
teri tamanna mujhse judaa hone ki,
aur meri tamanna tere Liye tabah hone ki..
hum dono ki..
teri tamanna mujhse judaa hone ki,
aur meri tamanna tere Liye tabah hone ki..
क्या अजीब सी ज़िद है..
हम दोनों की,
तेरी मर्ज़ी हमसे जुदा होने की..
और मेरी तेरे पीछे तबाह होने की..
हम दोनों की,
तेरी मर्ज़ी हमसे जुदा होने की..
और मेरी तेरे पीछे तबाह होने की..
کیا عجیب سی زد ہے
ہم دونو کی
تیری تمنّا مجھسے جدا ہونے کی
اور میری تمنّا تیرے لئے تباہ ہونے کی
ہم دونو کی
تیری تمنّا مجھسے جدا ہونے کی
اور میری تمنّا تیرے لئے تباہ ہونے کی
Pyaar Usse Is Kadar Karti Chali Jau,
Wo Zakhm De Aur Main Bharti Chali Jaau.
Uski Zid Hai Ki Wo Mujhe Maar Hi Daale To,
Meri Bhi Zid Hai Uspe Marti Chali Jaau..
Wo Zakhm De Aur Main Bharti Chali Jaau.
Uski Zid Hai Ki Wo Mujhe Maar Hi Daale To,
Meri Bhi Zid Hai Uspe Marti Chali Jaau..
प्यार उससे इस कदर करती चली जाऊँ,
वो जख़्म दे और मैं भरती चली जाऊँ.
उसकी ज़िद हैं कि वो मुझे मार ही डाले तो,
मेरी भी ज़िद हैं उसपे मरती चली जाऊँ..
वो जख़्म दे और मैं भरती चली जाऊँ.
उसकी ज़िद हैं कि वो मुझे मार ही डाले तो,
मेरी भी ज़िद हैं उसपे मरती चली जाऊँ..
پیار اسے اس کدر کرتی چلی جاو
وہ زخم دے اور می بھرتی چلی جاو
اسکی زد ہے کی وہ مجھے مار ہی دالے تو
میری بھی زد ہے اسپے مرتی چلی جاو
وہ زخم دے اور می بھرتی چلی جاو
اسکی زد ہے کی وہ مجھے مار ہی دالے تو
میری بھی زد ہے اسپے مرتی چلی جاو
Jis Mohabbat Mai Kisi ko Paane Ki Zid Ho......
Toh Voh Mohabbat Nhi...
Kyu Ki Mohabbat Dil Se Ki Jaati Hai...
Aur Zid Marzi Se.......
Toh Voh Mohabbat Nhi...
Kyu Ki Mohabbat Dil Se Ki Jaati Hai...
Aur Zid Marzi Se.......
जिस मोहब्बत मैं किसी को पाने की ज़िद हो......
तोह वोह मोहब्बत नहीं......
क्यों की मोहब्बत दिल से की जाती है......
और ज़िद मर्ज़ी से। .....
तोह वोह मोहब्बत नहीं......
क्यों की मोहब्बत दिल से की जाती है......
और ज़िद मर्ज़ी से। .....
جس موحبّت می کسی کو پانے کی زد ہو
ٹوہ وہ موحبّت نہی
کیکی موحبّت دل سے کی جاتی ہے
اور زد مرضی سے
ٹوہ وہ موحبّت نہی
کیکی موحبّت دل سے کی جاتی ہے
اور زد مرضی سے
Tumhaari Zid Bemaani Hai Dil Ne Haar Kab Mani Hai,
Kar Hi Lega Vash Me Tumhe Aadat Isaki Purani Hai..
Kar Hi Lega Vash Me Tumhe Aadat Isaki Purani Hai..
तुम्हारी ज़िद बेमानी है दिल ने हार कब मानी है,
कर ही लेगा वश में तुम्हें आदत इसकी पुरानी है.
कर ही लेगा वश में तुम्हें आदत इसकी पुरानी है.
تمہاری زد بمعنی ہے دل نے ہار کب مانی ہے
کر ہی لگا وش مے تمھ عادت اسکی پرانی ہے
کر ہی لگا وش مے تمھ عادت اسکی پرانی ہے